आज का शब्द: विस्मरण और सोम ठाकुर की कविता- तुम रहे हो द्वीप जैसे काव्य डेस्क
“ना पेशी होगी, ना गवाह होगा, अब जो भी हमसे उलझेगा बस तबाह होगा।”
हम बदमाशी के स्टूडेंट हैहम समझते नहीं है अपने दुश्मनो कोसीधा जान से मर देते हैं।
छोटी-छोटी बातों में तेरा ख्याल आना,ये इश्क़ नहीं तो फिर क्या है दीवानापन? ❤️
ज़िन्दगी से जो भी मिले सीने से लगा लो ❤️ गम को सिक्के की तरह उछाला नहीं करते…..
जावेद अख़्तर: हमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है काव्य डेस्क
मैने खेल हमेशाखुद के दम पर खेले हैइसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है!
बादशाह नही, टाइगर हूँ मैं,इसलिए लोग इज्ज़त Trending Shayari से नही,मेरी इजाज़त से मिलते है।
तेरी आवाज़ में वो जादू है,जो दिल को बिना वजह ही खुश कर देता है।
“मत करो मेरी पीठ के पीछे बात जाकर कोने में।
“पहचान तो सबसे है हमारी, पर भरोसा सिर्फ खुद पर है।”
तेरे इश्क़ में इतना क्यूट बन गया हूँ मैं,अब आइने भी मुझसे जलने लगे हैं।
भवानीप्रसाद मिश्र: मैं जो हूँ मुझे वही रहना चाहिए काव्य डेस्क